डेयरी फार्मिंग और सामान्य पशुपालन से जुड़े किसानों के लिए सर्दी के दिनों में बरसींम चारा किसी वरदान से कम नहीं है. सर्दी के मौसम में उपलब्ध यह हरा चारा दुधारू पशुओं के स्वास्थ्य और दूध उत्पादन दोनों के लिए बेहद फायदेमंद माना जाता है. सीतामढ़ी के पशु पालक रूपेश कुमार के अनुसार बरसींम में प्रोटीन, फास्फोरस और कैल्शियम की प्रचुर मात्रा पाई जाती है जो पशुओं की ताकत बढ़ाने के साथ दूध की मात्रा और गुणवत्ता में भी सुधार करता है. यही कारण है कि पशुपालक इस मौसम में बरसींम को अपने चारा प्रबंधन में प्राथमिकता दे रहे हैं. बरसींम की मुख्य रूप से तीन उन्नत वैरायटी प्रचलन में हैं. पहली मसकावी बरसींम जो जल्दी बढ़ती है और बार-बार कटाई के लिए उपयुक्त होती है. दूसरी वर्दान वैरायटी. जिसमें हरे चारे की उपज अधिक होती है. वर्दान वैरायटी की बरसीम ठंड को भी अच्छी तरह सहन करती है. तीसरी बीएल-10 या जेएचबी-146 जैसी उन्नत किस्में हैं जो रोग प्रतिरोधक क्षमता के साथ अधिक प्रोटीन प्रदान करती हैं. रूपेश कुमार बताते हैं कि सही वैरायटी का चयन करने से पशुओं के दुग्ध उत्पादन पर सीधा असर पड़ता है. वीडियो में उन्होंने बरसींम खिलाने के कुछ जरूरी टिप्स भी बताए हैं, जिन्हें अपनाना जरूरी है. पशु पालक रूपेश कुमार के अनुसार बरसींम को हमेशा थोड़ी मात्रा में सूखे भूसे या पराली के साथ मिलाकर खिलाना चाहिए, ताकि....
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डेयरी फार्मिंग और सामान्य पशुपालन से जुड़े किसानों के लिए सर्दी के दिनों में बरसींम चारा किसी वरदान से कम नहीं है. सर्दी के मौसम में उपलब्ध यह हरा चारा दुधारू पशुओं के स्वास्थ्य और दूध उत्पादन दोनों के लिए बेहद फायदेमंद माना जाता है. सीतामढ़ी के पशु पालक रूपेश कुमार के अनुसार बरसींम में प्रोटीन, फास्फोरस और कैल्शियम की प्रचुर मात्रा पाई जाती है जो पशुओं की ताकत बढ़ाने के साथ दूध की मात्रा और गुणवत्ता में भी सुधार करता है. यही कारण है कि पशुपालक इस मौसम में बरसींम को अपने चारा प्रबंधन में प्राथमिकता दे रहे हैं. बरसींम की मुख्य रूप से तीन उन्नत वैरायटी प्रचलन में हैं. पहली मसकावी बरसींम जो जल्दी बढ़ती है और बार-बार कटाई के लिए उपयुक्त होती है. दूसरी वर्दान वैरायटी. जिसमें हरे चारे की उपज अधिक होती है. वर्दान वैरायटी की बरसीम ठंड को भी अच्छी तरह सहन करती है. तीसरी बीएल-10 या जेएचबी-146 जैसी उन्नत किस्में हैं जो रोग प्रतिरोधक क्षमता के साथ अधिक प्रोटीन प्रदान करती हैं. रूपेश कुमार बताते हैं कि सही वैरायटी का चयन करने से पशुओं के दुग्ध उत्पादन पर सीधा असर पड़ता है. वीडियो में उन्होंने बरसींम खिलाने के कुछ जरूरी टिप्स भी बताए हैं, जिन्हें अपनाना जरूरी है. पशु पालक रूपेश कुमार के अनुसार बरसींम को हमेशा थोड़ी मात्रा में सूखे भूसे या पराली के साथ मिलाकर खिलाना चाहिए, ताकि....
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डेयरी फार्मिंग और सामान्य पशुपालन से जुड़े किसानों के लिए सर्दी के दिनों में बरसींम चारा किसी वरदान से कम नहीं है. सर्दी के मौसम में उपलब्ध यह हरा चारा दुधारू पशुओं के स्वास्थ्य और दूध उत्पादन दोनों के लिए बेहद फायदेमंद माना जाता है. सीतामढ़ी के पशु पालक रूपेश कुमार के अनुसार बरसींम में प्रोटीन, फास्फोरस और कैल्शियम की प्रचुर मात्रा पाई जाती है जो पशुओं की ताकत बढ़ाने के साथ दूध की मात्रा और गुणवत्ता में भी सुधार करता है. यही कारण है कि पशुपालक इस मौसम में बरसींम को अपने चारा प्रबंधन में प्राथमिकता दे रहे हैं. बरसींम की मुख्य रूप से तीन उन्नत वैरायटी प्रचलन में हैं. पहली मसकावी बरसींम जो जल्दी बढ़ती है और बार-बार कटाई के लिए उपयुक्त होती है. दूसरी वर्दान वैरायटी. जिसमें हरे चारे की उपज अधिक होती है. वर्दान वैरायटी की बरसीम ठंड को भी अच्छी तरह सहन करती है. तीसरी बीएल-10 या जेएचबी-146 जैसी उन्नत किस्में हैं जो रोग प्रतिरोधक क्षमता के साथ अधिक प्रोटीन प्रदान करती हैं. रूपेश कुमार बताते हैं कि सही वैरायटी का चयन करने से पशुओं के दुग्ध उत्पादन पर सीधा असर पड़ता है. वीडियो में उन्होंने बरसींम खिलाने के कुछ जरूरी टिप्स भी बताए हैं, जिन्हें अपनाना जरूरी है. पशु पालक रूपेश कुमार के अनुसार बरसींम को हमेशा थोड़ी मात्रा में सूखे भूसे या पराली के साथ मिलाकर खिलाना चाहिए, ताकि....
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