दिल्ली हाईकोर्ट ने एक अहम फैसले में साफ कर दिया कि कामकाजी माताओं की चाइल्ड केयर लीव (CCL) मनमर्जी से नहीं रोकी जा सकती. एक मामले में स्कूल प्रिंसिपल ने ‘स्टाफ की कमी’ का हवाला देकर महिला टीचर की CCL अर्जी ठुकरा दी थी, लेकिन हाईकोर्ट ने इसे मनमाना और नियमों की भावना के खिलाफ बताया. कोर्ट ने कहा कि CCL का मकसद मां और बच्चे की जरूरतों को प्राथमिकता देना है, न कि प्रशासनिक बहानों में उलझाना.
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दिल्ली हाईकोर्ट ने एक अहम फैसले में साफ कर दिया कि कामकाजी माताओं की चाइल्ड केयर लीव (CCL) मनमर्जी से नहीं रोकी जा सकती. एक मामले में स्कूल प्रिंसिपल ने ‘स्टाफ की कमी’ का हवाला देकर महिला टीचर की CCL अर्जी ठुकरा दी थी, लेकिन हाईकोर्ट ने इसे मनमाना और नियमों की भावना के खिलाफ बताया. कोर्ट ने कहा कि CCL का मकसद मां और बच्चे की जरूरतों को प्राथमिकता देना है, न कि प्रशासनिक बहानों में उलझाना.
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दिल्ली हाईकोर्ट ने एक अहम फैसले में साफ कर दिया कि कामकाजी माताओं की चाइल्ड केयर लीव (CCL) मनमर्जी से नहीं रोकी जा सकती. एक मामले में स्कूल प्रिंसिपल ने ‘स्टाफ की कमी’ का हवाला देकर महिला टीचर की CCL अर्जी ठुकरा दी थी, लेकिन हाईकोर्ट ने इसे मनमाना और नियमों की भावना के खिलाफ बताया. कोर्ट ने कहा कि CCL का मकसद मां और बच्चे की जरूरतों को प्राथमिकता देना है, न कि प्रशासनिक बहानों में उलझाना.
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